Female Sexual Problems

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Female Sexual Problems & Treatment

Sexual problems in women are common. They are estimated to affect around one-third of young and middle-aged women and about half of older women.

Common Female Sexual Problem

  • lack of sexual desire

    lack of sexual desire (or 'sex drive') is often described as a loss of libido and many women can experience a variety of symptoms.

  • lack of sexual arousal

    lack of sexual arousal (not feeling 'turned on') may result from a lack of vaginal lubrication, a relationship worry or ill health. A lack of sexual desire and a lack of sexual arousal often occur together. And treatment of one often improves the other. It is important you see your doctor to describe the symptoms you are having as there are a variety of treatments available.

  • Problems with orgasm

    These include never having an orgasm, delayed or infrequent orgasms, and a reduction in the strength of orgasmic sensations. While some women do not need to have an orgasm to enjoy sex, this may be a real problem for others and their partners

  • Pain during or after sex

    Some women can experience pain during sex. This may be due to reduced vaginal lubrication and insufficient foreplay before penetration. It can become a problem and stop a woman from having or enjoying sexual intimacy .

There can be thousands of problems depending upon the person to person. DR.ANIL GAIKWAD has been rendering the valuable services through medications, counseling, therapies and much more. The main motive of the company is to reduce the stress which is arising between married couple. Research shows that maximum fighting occurred due to not satisfying the partner at the fullest.

Dr.ANIL GAIKWAD offers useful tips to maintain the sexual health and to improve further. Females feeling shy may write the doctor through mail or may seek online consultation. One should not neglect the personal problem as it may create public if not resolved in the right time. Females usually have problems due to stress and not having the diet on time. Working woman does lack of proper time schedule due to which they are unable to maintain their lives.

Doctor will offer the better guidance about what to intake and what to avoid. Contact Dr.ANIL GAIKWAD for all the sex health problems which are making your life miserable. Privacy will be maintained not to harm the safeguards of any female.


Female Infertility

बाँझपन जिसे कई लोग बन्ध्यापन तथा अनुर्वरता के नाम से भी जानते हैं | किसी भी युवक और युवती के लिए बाँझपन किसी अभिश्राप से कम नहीं होता | अमुमन हमारे समाज में बाँझपन की समस्या को महिलाओ से जोड़कर देखा जाता रहा हैं लेकिन यह अवधारणा बिल्कुल ही गलत हैं क्यूंकि एक बच्चे को जन्म देने में जितनी अहम भूमिका स्त्री की होती हैं उतनी ही सामान भागिदारी पुरुष की भी होती हैं | इसलिए बाँझपन के लिए सिर्फ स्त्री को जिम्मेवार ठहराना बिल्कुल ही गलत हैं | बांझपन से जुड़े कुछ अहम सवाल जैसे की

  • बाँझपन क्या हैं ?

    बाँझपन की समस्या दो प्रकार की होतीं हैं – प्राकृतिक और अप्राकृतिक, अगर किसी महिला या पुरुष में बाँझपन की समस्या बचपन से यानि कुदरती है तो उस समस्या को प्राकृतिक बाँझपन समझा जाता हैं | इनफर्टिलिटी मुख्यतय दो तरह से होती है। पहली जन्मजात जिसे 'बन्ध्या' बांझपन से जाना जाता है। और दूसरी 'मृतवत्सा वन्ध्या' से जाना जाता है, जिसमें पहला बच्चा होने पर दूसरा बच्चा नही होता। परन्तु आईवीएफ एवं कृत्रिम गर्भाधान उपचार के माध्यम से दोनो तरह के इनफर्टिलिटी का उपचार सम्भव है।

    अगर कोई कपल गर्भनिरोधक और कंडोम के इस्तेमाल के बिना कम से कम एक साल या इससे भी अधिक समय तक शारीरिक सम्बन्ध बना रहे हो और उसके बाद भी संतान सुख से वंचित रह रहे हो तो उन महिला या पुरुष दोनों में से किसी एक के साथ infertility (बाँझपन) की समस्या हो सकती है | बांझपन एक बीमारी है, कोई अभिशाप नहीं । इसका इलाज अन्य बिमारियों की तरह संभव होता है ।

  • बाँझपन के क्या कारण हैं ?

    स्त्रियों में Infertility के कई कारण हो सकते हैं जो की कई स्वास्थ्य समस्यायों से प्रभावित हो सकती है, जैसे कि :- पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (पीसीओ), ऐंडोमेटरिओसिज़, श्रोणि सूजन की बीमारी, गर्भाशय फाइब्रॉएड, एनीमिया, थायराइड की समस्याएं, अवरुद्ध फैलोपियन ट्यूबज़, कैंडिडा और यौन संचारित रोग (एसटीडी), अधिक मदिरा-सेवन, धुम्रपान, आयु (35 वर्ष से अधिक), मोटापा, अत्यधिक-तनाव, अनियमित एवं दर्दपूर्ण माहवारी की समस्या, पोषण-रहित भोजन या फिर अत्यधिक शारीरिक-प्रशिक्षण भी स्त्री की गर्भ-धारण क्षमता को प्रभावित करने के अहम कारण हैं

  • बाँझपन के क्या लक्षण हैं ?

    ★ 21 दिन से कम समय के अंतराल में पीरियड्स आना.
    ★ पीरियड्स के दौरान 2 दिन से भी कम समय तक ब्लीडिंग होना.
    ★ पीरियड्स के बीच में ब्लीडिंग होना जिसे इंटरमैंस्ट्रुअल ब्लीडिंग कहते हैं. इसे स्पौटिंग भी कहते हैं.
    ★ मासिकचक्र में पीरियड्स न आना.
    ★ पीरियड्स 35 दिन के अंतराल से अधिक समय में आना.
    ★ मासिकचक्र के दौरान अत्यधिक ब्लीडिंग होना.
    ★ त्वचा में परिवर्तन आ जाना, जिस में अत्यधिक मुंहासे होना सम्मिलित है.
    ★ सैक्स करने की इच्छा में परिवर्तन आ जाना.
    ★ होंठों, छाती और ठुड्डी पर बालों का विकास.
    ★ बालों का झड़ना या पतला होना.
    ★ वजन बढ़ना.
    ★ निप्पल से दूध जैसा सफेद डिस्चार्ज निकलना, जो स्तनपान से संबंधित नहीं होता है.
    ★ सैक्स के दौरान दर्द होना.

  • बाँझपन का उपाय और इलाज

    आईवीएफ पद्धति / Vitro Fertilization (ibf)
    आईवीएफ शरीरिक स्वस्थ जांच के बाद 4 बार तक सम्भव है। आईवीएफ विधि में महिला को इंजेक्शन लगायें जाते हैं। जिससे छोटे छोटे कृत्रिम अण्डे़ बनते हैं। अण्डों को परखनली में पुरूष स्पर्म मिलाकर अम्ब्रयोज बनाया जाता है, जिसे स्त्री गर्भ में पहुंचाया जाता है। जिससे बच्चा असानी से ठहर जाता है। आईवीएफ इलाज में 10 से 20 दिन का समय लग जाता है। सर्वे आंकड़ों के मुताबिक हर साल लाखों निसंतान दंपति आईवीएफ विधि का लाभ देते हैं। आईवीएफ निसंतान दंपतियों के लिए बरदान साबित है। आईवीएफ इजेक्शन विधि से 80 प्रतिशत सम्भावनाएं बढ़ जाती है।

    कृत्रिम गर्भधारण / Artificial Insemination
    कृत्रिम गर्भाधान या आइवीएफ (इन विट्रो फर्टिलाइजेशन) में अंडों को अंडाशय से शल्य क्रिया द्वारा बाहर निकाल कर शरीर से बाहर पेट्री डिश में शुक्राणु के साथ मिलाया जाता है। करीब 40 घंटे के बाद अंडों का परीक्षण किया जाता है कि वे निषेचित हो गये हैं या नहीं और उनमें कोशिकाओं का विभाजन हो रहा है। इन निषेचित अंडों को महिला के गर्भाशय में रख दिया जाता है और इस तरह गर्भ-नलिकाओं का उपयोग नहीं होता है। इस प्रक्रिया में, विशेष रूप से तैयार किए गए वीर्य को महिला के अन्दर इंजैक्शन द्वारा पहुँचाया जाता है।